बिहार के हैडमास्टरों पर गिरी गाज! विभाग से मिला वेतन काटने का आदेश
बिहार में सरकारी स्कूलों से जुड़ी जवाबदेही को लेकर शिक्षा विभाग ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। अब कार्रवाई की जद में शिक्षक नहीं, बल्कि स्कूलों के हेडमास्टर आ गए हैं। राज्य के बयासी सरकारी स्कूलों के हेडमास्टरों पर गाज गिरने वाली है। इन पर करीब 16.40 लाख रुपये के हिसाब में गड़बड़ी का आरोप है। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि अगर तय राशि का हिसाब नहीं दिया गया, तो यह रकम सीधे हेडमास्टरों की सैलरी से काटकर वसूली जाएगी। इस संबंध में विभाग ने औपचारिक आदेश भी जारी कर दिया है।
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आपको बता दे कि मुख्यमंत्री परिभ्रमण योजना में लापरवाही बरतने वाले जिले के सरकारी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों पर अब सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है। जिले के बयासी विद्यालयों के हेडमास्टर पिछले सात वर्षों से 16 लाख 40 हजार रुपये का हिसाब नहीं दे पाए हैं, जिसे लेकर शिक्षा विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। इस मामले में अब केवल चेतावनी नहीं, बल्कि सीधे वेतन कटौती की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
दरअसल, मुख्यमंत्री परिभ्रमण योजना के तहत वर्ष 2017-18 में प्रत्येक स्कूल को 20-20 हजार रुपये की राशि शैक्षणिक भ्रमण और छात्रों के शैक्षणिक विकास से जुड़ी गतिविधियों के लिए उपलब्ध कराई गई थी। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतने वर्षों के बाद भी जिले के बयासी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों ने इस राशि से संबंधित डीसी विपत्र (उपयोगिता प्रमाण पत्र) अब तक जमा नहीं कराया है।
विपत्र जमा कराने को लेकर शिक्षा विभाग ने कई बार पत्राचार किया और मौखिक निर्देश भी दिए, लेकिन जब इसका कोई असर नहीं दिखा, तो 8 जनवरी को विशेष कैंप का आयोजन किया गया। इस कैंप को अंतिम चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा था, ताकि सभी प्रधानाध्यापक अपना डीसी विपत्र जमा कर सकें। हालांकि, इस विशेष शिविर में भी केवल छह स्कूलों के प्रधानाध्यापकों ने ही विपत्र जमा कराया, जबकि बाकी हेडमास्टरों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी राघवेंद्र मणि त्रिपाठी ने अब सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने डीपीओ स्थापना को आदेश दिया है कि जब तक संबंधित प्रधानाध्यापक मुख्यमंत्री परिभ्रमण योजना का डीसी विपत्र जमा नहीं करते, तब तक उन्हें अनुपस्थित मानते हुए वेतन से कटौती की जाए। इतना ही नहीं, कटौती की गई राशि को सीधे कोषागार में जमा कराया जाएगा और इस कार्रवाई का उल्लेख संबंधित प्रधानाध्यापक की सेवा पुस्तिका में भी दर्ज किया जाएगा।
शिक्षा विभाग का मानना है कि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है। वर्षों तक हिसाब नहीं देना न सिर्फ वित्तीय अनियमितता की ओर इशारा करता है, बल्कि इससे सरकार की योजनाओं की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े होते हैं। ऐसे में लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई जरूरी हो जाती है। जानकारी के अनुसार, इस कार्रवाई की जद में बाजपट्टी प्रखंड के चार, बथनाहा के दो, बेलसंड के एक, बोखड़ा के चार, डुमरा के छह, मेजरगंज के दो, नानपुर के सात, परिहार के 13, पुपरी के एक, रीगा के एक, रुन्नीसैदपुर के सबसे अधिक 30, सोनबरसा के पांच, सुप्पी के एक और सुरसंड के पांच विद्यालयों के प्रधानाध्यापक शामिल हैं।
Divya Singh